क्या है बुखार- What is a fever in Hindi

by Wisehealths

Posted on 2019-05-24


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लेखिका:-डॉ. पूनम 

     बुखार सामान्यतः एक चिकित्सकीय लक्षण हैं,  जो विभिन्न प्रकार की शारीरिक बिमारियों के कारण प्रभाव   में आता है।  बुखार को ज्वर भी कहा जाता है। 
शरीर का सामान्य तापमान व्यक्ति विशेष, आयु व उसकी शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करता है। वैज्ञानिक आधार पर शरीर का सामान्य तापमान 98.6 डिग्री फेरनहाइट (37 डिग्री सेल्सियस) माना गया है। वहीं, कुछ अन्य अध्ययन के अनुसार सामान्य तापमान को 97 डिग्री फेरनहाइट (36.1 डिग्री सेल्सियस) से 99 डिग्री फेरनहाइट (37.2 डिग्री सेल्सियस) के बीच माना गया है। जब शरीर का तापमान इससे ऊपर जाता है, तो इस स्थिति को बुखार या फिर ज्वर कहा जाता है। वहीं बच्चों व नवजात के शरीर का सामान्य तापमान 97.9 डिग्री फेरनहाइट (36.61 डिग्री सेल्सियस) से 100.4 डिग्री फेरनहाइट (38 डिग्री सेल्सियस) के बीच होता है।

बुखार सामान्यत: चार  प्रकार का होता है :-

1 . मलेरिया 
   मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्‍छर के काटने से फैलता है।यह एक संक्रामक रोग है जिसमें ठंड के साथ बुखार होता है।सिरदर्द, उल्‍टी, जी मिचलाना हैं इसके सामान्‍य लक्षण।इसका पता चलने पर तुंरत रक्‍त की जांच करानी चाहिए।

2. टाइफाइड 
  टाइफाइड साल्मोनेला बैक्टीरिया से फैलने वाली खतरनाक बीमारी है। इसे मियादी बुखार भी कहते हैं। टाइफाइड फीवर पाचन तंत्र  में बैक्टीरिया के इंफेक्शन की वजह से होता है। गंदे पानी और संक्रमित जूस  के साथ साल्मोनेला बैक्टीरिया हमारे शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है। टायफायड की संभावना किसी संक्रमित व्यक्ति के जूठे खाद्य-पदार्थ के खाने-पीने से भी हो सकती है। वहीं दूषित खाद्य पदार्थ के सेवन से भी ये संक्रमण हो जाता है।  टाइफाइड के इलाज में जरा सी  भी लापरवाही नहीं बरतनी चाह‌िए। यदि  दवाओं का कोर्स पूरा न किया जाए तो इसके वापस आने की भी संभावना रहती है।

3. डेंगू
 अगर तेज बुखार हो, जोड़ों  में तेज दर्द हो या शरीर पर रैशेज हों तो पहले दिन ही डेंगू का टेस्ट करा लेना चाहिए। डेंगू की जांच के लिए शुरुआत में एनएस 1 (एंटीजन ब्लड टेस्ट) किया जाता है। जिसमें डेंगू किस प्रकार का है यह पता चल जाता है। इस टेस्ट में डेंगू शुरू में ज्यादा पॉजिटिव आता है, जबकि बाद में धीरे-धीरे पॉजिविटी कम होने लगती है।

4 . वायरल
 वायरल फीवर दुनिया के सभी भागों में पाये जाता  हैं और सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करता  हैं। इनमें से अधिकतर संक्रमण खुद तक ही सीमित होते हैं अर्थात वे अपने आप ही ठीक हो जाते हैं।

इसका मतलब यह नहीं हुआ कि हम कहना चाहते हैं कि वायरस गंभीर बीमारियां पैदा नहीं कर सकते। डेंगू बुखार, चिकनगुनिया और जापानी इन्सेफेलाइटिस भी वायरस के कारण ही होते हैं। हालांकि, साधारण वायरल बुखार के जो आम लक्षण हैं, उन्हें घर पर ही स्वयं कुछ देखभाल के साथ नियंत्रित किया जा सकता है।

वायरल संक्रमण की पहचान में आने वाले शुरुआती लक्षण अक्सर थकान और बदन दर्द होता है। उसके बाद बुखार की शुरुआत होती है। ज्यादातर मामलों में बुखार के साथ- साथ श्वसन संबंधित लक्षण जैसे गले में खराश, नाक का बहना, नाक का जाम होना और आंखे लाल होना जैसे लक्षण हो सकते हैं। सिरदर्द भी वायरल संक्रमण का एक आम लक्षण है। कुछ मामलों में उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं। ये लक्षण आमतौर पर, तीन से सात दिन में ठीक हो जाते हैं, हालांकि थकान लंबे समय तक बनी रह सकती है। अगर बुखार इस समय सीमा के भीतर ठीक नहीं होता है तो डॉक्टर को दिखाने की सलाह दी जाती है।


बुखार के कारण-कारण-Causes of Fever

   बुखार के निम्नलिखित कारण है:-
1. दवाईयों का गलत प्रभाव
2. जीवाणु संक्रमण, जैसे- गले-नाक में सूजन, फ्लू, चिकनपॉक्स या निमोनिया
4. सन स्ट्रोक
5. डिहाइड्रेशन
6. फेफड़े संबंधी बीमारी
8. आथाेराइटिस
बुखार के लक्षण-Symptoms of fever
   बुखार के निम्नलिखित लक्षण है:-
1. शरीर में कंपंन
2. भूख न लगना
3. ठंड लगना
4. तनाव
5. सिर दर्द
6. शरीर में पानी की कमी
7. ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
8. सुस्ती

अगर तेज बुखार हो, जॉइंट्स में तेज दर्द हो या शरीर पर रैशेज हों तो पहले दिन ही डेंगू का टेस्ट करा लेना चाहिए। डेंगू की जांच के लिए शुरुआत में एंटीजन ब्लड टेस्ट (एनएस 1) किया जाता है। जिसमें डेंगू किस प्रकार का है यह पता चल जाता है। इस टेस्ट में डेंगू शुरू में ज्यादा पॉजिटिव आता है, जबकि बाद में धीरे-धीरे पॉजिविटी कम होने लगती है। ये टेस्ट खाली या भरे पेट, कैसे भी कराए जा सकते हैं।

बुखार से बचने के लिए कुछ घरेलू उपाय-

बुखार से बचने के लिए हम घरेलू नुस्खे भी प्रयोग में ला सकते हैं जो निम्नलिखित  हैं:-

1.हल्दी और सौंठ (अदरक) का पाउडर


अदरक में एंटी आक्सिडेंट गुण बुखार को ठीक करते हैं. एक चम्मच काली मिर्च का चूर्ण, एक छोटी चम्मच हल्दी का चूर्ण और एक चम्मच सौंठ यानी अदरक के पाउडर को एक कप पानी और हल्की सी चीनी डालकर गर्म कर लें. जब यह पानी उबलने के बाद आधा रह जाए तो इसे ठंडा करके पिएं. इससे  फीवर(बुखार) में आराम मिलता है

2. तुलसी का इस्तेमाल


तुलसी में एंटीबायोटिक गुण होते हैं जिससे शरीर के अंदर के वायरस खत्म होते हैं. एक चम्मच लौंग के चूर्ण और दस से पंद्रह तुलसी के ताजे पत्तों को एक लीटर पानी में डालकर इतना उबालें जब तक यह सूखकर आधा न रह जाए. इसके बाद इसे छानें और ठंडा करके हर एक घंटे में पिएं. आपको बुखार से जल्द ही आराम मिलेगा

3. गिलोय का प्रयोग 

यदि प्रतिदिन गिलोय की 6 इंच लम्बी बेल को रोज़ चबाकर रस निगल लिया जाये तो बुखार का वायरस शरीर में पहुचकर भी सक्रिय नहीं हो पायेगा ।

4. मेथी का पानी

मेथी के दानों को एक कप में भरकर इसे रात भर के लिए भिगों लें और सुबह के समय इसे छानकर हर एक घंटे में पिएंगे तो जल्दी ही आराम मिलेगा

5. नींबू और शहद


नींबू का रस और शहद भी फीवर के असर को कम करता हैं। आप शहद और नींबू के रस का सेवन भी कर सकते हैं. 


यदि आपको इन उपायों से कोई राहत न मिले तो आप तुरंत डाक्टर से परामर्श लें  और  रक्‍त की जांच  अवश्य करायें 
धन्यवाद।।  

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